सोलर ऊर्जा से रोजगार की नई राह, 2.5 लाख युवाओं को ट्रेनिंग

अक्टूबर 25, नई दिल्ली: देश में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। इससे तकनीशियनों, स्थानीय कारोबारियों और सोलर उपकरण बनाने वाली कंपनियों को काम मिल रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, भारत में सौर ऊर्जा से बिजली बनाने की कुल क्षमता 2014 में तीन गीगावॉट थी। अब यह बढ़कर 168 गीगावॉट से अधिक हो गई है। वहीं, पीएम सूर्य घर योजना के तहत अब तक 18.5 गीगावॉट क्षमता के सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इससे 60 लाख से अधिक परिवारों को फायदा हुआ है।

इस योजना से सोलर पैनल बनाने, उन्हें एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने, बेचने, लगाने और उनकी मरम्मत करने जैसे कामों में रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। अनुमान है कि इन सभी कामों से करीब 17 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल सकता है।

सोलर से जुड़े कामों के लिए युवाओं को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। अब तक 2.5 लाख से अधिक युवाओं को इस क्षेत्र में काम करने की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। लक्ष्य तीन लाख कुशल लोगों को तैयार करना है। इनमें एक लाख ऐसे तकनीशियन शामिल होंगे, जिन्हें सोलर पैनल लगाने और उनसे जुड़े कामों की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।

राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (एनआईएसई), राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान (एनपीटीआई) और स्किल काउंसिल फॉर ग्रीन जॉब्स जैसी संस्थाएं युवाओं को प्रशिक्षण देने में मदद कर रही हैं। इससे इलेक्ट्रिशियन, तकनीशियन और सोलर पैनल लगाने वाले कारीगरों को काम के नए अवसर मिल सकते हैं।

पीएम सूर्य घर योजना से अब तक 37 हजार से अधिक स्थानीय वेंडर्स जुड़ चुके हैं। ये वेंडर्स छोटे शहरों और कस्बों में लोगों को सोलर पैनल बेचने, लगाने और उनकी मरम्मत करने जैसी सेवाएं देते हैं।

इससे छोटे कारोबारियों और छोटे उद्योगों को अपना काम शुरू करने का मौका मिल रहा है। वेंडर्स को सोलर पैनल लगाने के सही तरीके और कारोबार चलाने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है, ताकि वे लोगों को बेहतर सेवाएं दे सकें।

सरकार का लक्ष्य एक करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाना है। इससे देश में सोलर उपकरण बनाने वाली कंपनियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। सोलर पैनल, बिजली बनाने में इस्तेमाल होने वाले दूसरे उपकरण, इनवर्टर, पैनल लगाने के ढांचे और तारों की मांग बढ़ रही है। इससे देश में इन उपकरणों का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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